मित्रो आज से योगगुरु बाबा रामदेव जी ने दिल्ली के रामलीला मैदान में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन 'सत्याग्रह' शुरू करके भारत के पुनरुत्थान (नवनिर्माण) का शंखनाद कर दिया है। हम बाबा जी के इस महान यज्ञ के सफलता के लिए परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना करते है।
अभी कुछ दिन पहले ही अन्ना भाऊ ने निद्रा में लीन सरकार को झकझोरा था पर अन्ना के ही अनुसार 'सरकार ने उन्हे धोखा ही दिया है अबतक और सरकार का एक कमजोर लोकपाल बनाने का इरादा है' ठीक ही कहा गया है किसी को निद्रा से जगाना तो आसान है परन्तु जानबूझकर निद्रा का ढोंग करने वाले को कौन जगा सकता है। साथ ही अन्नाजी द्वारा भी कई मामलो में वेवजह की गयी बयानबाजी भी सरकार के पक्ष में रही, हालाँकि इसमे कोई शक नहीं की अन्ना भाऊ एक नेक और सच्चे देशभक्त इंसान है।
बाबा की ललकार!!योजनावद्ध तैयारी का परिणाम....

नैतिक बल का पर्याय है, बाबा का हठयोग.....



बाबा की महत्वपूर्ण मांग अंग्रेजी की अनिवार्यता भी खत्म करना है। इसमें कोई दो राय नहीं अंग्रेजी ने असमानता बढ़ाने का काम तो पिछले 63 सालों में किया ही है, अब वह अपारदर्शिता का पर्याय बनकर मंत्री और नौकरशाहों के भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने का भी सबब बन रही है। बीते एक-डेढ़ साल में भ्रष्टाचार के जितने बड़े मुद्दे सामने आए हैं, उन्हें अंग्रेजीदां लोगों ने ही अंजाम दिया है। पर्यावरण संबंधी मामलों में अंग्रेजी एक बड़ी बाधा के रूप में सामने आ रही है। जैतापुर परमाणु बिजली परिर्याजना के बाबत 1200 पृष्ठ की जो रिपोर्ट है, वह अंग्रेजी में है और सरकार कहती है कि हमने इस परियोजना से प्रभावित होने वाले लोगों को शर्तों और विधानों से अवगत करा दिया है। अब कम पढ़े-लिखे ग्रामीण इस रिपोर्ट को तब न बांच पाते जब यह मराठी, कोंकणी अथवा हिन्दी में होती ? लेकिन फिर स्थानीय लोग इस परियोजना की हकीकत से वाकिफ न हो जाते ? बहरहाल रामदेव के सत्याग्रही अनुष्ठान की मांगे उचित होने के साथ जन सरकारों से जुड़ी हैं। इस अनुष्ठान की निष्ठा खटाई में न पड़े इसलिए इन मांगों की पूर्ति के लिए सरकार समझौते के लिए सामने आती है तो उन्हें समय व चरणबध्द शर्तों के आधार पर माना जाए।
अंत में दो बाते ......
पहली बात बाबा के सत्याग्रह पर आपत्ति करने वालो से .... वैसे तो शायद ही कोई देशभक्त हो जो बाबा के मांगो से सहमत ना हो, फिर भी कुछ मांगो पे बहस हो सकती है जैसे भ्रष्टाचारियो को मृत्युदंड (फांसी) कि सजा देना,हा ये सच है कि दुनिया भर में फांसी कि सजा का विरोध करने वाले लोग बढ़ रहे है ऐसे में कठोर सजा और लूटे गए धन कि अधिकतम वसूली इसका विकल्प हो सकता है और इसपर सहमती बनाई जा सकती है। बड़े नोटों के बंद करने के मामले में कम से कम १००० के नोट तत्काल बंद किया जा सकता है। लेकिन कुछ लोग (खासकर भ्रष्ट और बेईमान लोग) बेवजह भी आपत्ति कर रहे है , और ऐसे लोग बाबा को अपना काम करना चाहिए जैसे फार्मूले भी सुझा रहे है । कुटिल दिग्विजय सिंह का तो पहले ही एक ब्लोगीय कोर्टमार्शल कर चूका हु अब एक नया नाम बडबोले शाहरुख़ खान का आया है।जी हा वही जनाब शाहरुख़ खान जो परदे पे दुसरो का चरित्र निभाते निभाते अब अपने वास्तविक जीवन में भी बहुरुपिया हो गये है , किसी भी मामले में अपनी टांग अड़ाने में माहिर है , चाहे IPL में पाकिस्तानी खिलाडियों के ना खिलाने का मामला रहा हो या दिग्गज कलाकारों से द्वेष करना हो, खुद को किंग खान मान लेना हो या पूर्व कप्तान गावस्कर , सौरव गांगुली का अपमान करने कि कोशिश, मौका नहीं छोड़ते। खुद नाचते गाते क्रिकेट में घुसना हो (धंधे के लिए) और दुसरो को अपने काम करे का नसीहत देते है। खुद राहुल बाबा की चापुलुसी करने वाला बाबा रामदेव को कैसे जान सकता है,कोलकाता की टीम शेयर में काले धन का जम कर इस्तेमाल हुआ है वक्त आने पे सब पता चल जायेगा।ऐसे लोगो के लिए बाबा का ये कथन ही काफी है
पहली बात बाबा के सत्याग्रह पर आपत्ति करने वालो से .... वैसे तो शायद ही कोई देशभक्त हो जो बाबा के मांगो से सहमत ना हो, फिर भी कुछ मांगो पे बहस हो सकती है जैसे भ्रष्टाचारियो को मृत्युदंड (फांसी) कि सजा देना,हा ये सच है कि दुनिया भर में फांसी कि सजा का विरोध करने वाले लोग बढ़ रहे है ऐसे में कठोर सजा और लूटे गए धन कि अधिकतम वसूली इसका विकल्प हो सकता है और इसपर सहमती बनाई जा सकती है। बड़े नोटों के बंद करने के मामले में कम से कम १००० के नोट तत्काल बंद किया जा सकता है। लेकिन कुछ लोग (खासकर भ्रष्ट और बेईमान लोग) बेवजह भी आपत्ति कर रहे है , और ऐसे लोग बाबा को अपना काम करना चाहिए जैसे फार्मूले भी सुझा रहे है । कुटिल दिग्विजय सिंह का तो पहले ही एक ब्लोगीय कोर्टमार्शल कर चूका हु अब एक नया नाम बडबोले शाहरुख़ खान का आया है।जी हा वही जनाब शाहरुख़ खान जो परदे पे दुसरो का चरित्र निभाते निभाते अब अपने वास्तविक जीवन में भी बहुरुपिया हो गये है , किसी भी मामले में अपनी टांग अड़ाने में माहिर है , चाहे IPL में पाकिस्तानी खिलाडियों के ना खिलाने का मामला रहा हो या दिग्गज कलाकारों से द्वेष करना हो, खुद को किंग खान मान लेना हो या पूर्व कप्तान गावस्कर , सौरव गांगुली का अपमान करने कि कोशिश, मौका नहीं छोड़ते। खुद नाचते गाते क्रिकेट में घुसना हो (धंधे के लिए) और दुसरो को अपने काम करे का नसीहत देते है। खुद राहुल बाबा की चापुलुसी करने वाला बाबा रामदेव को कैसे जान सकता है,कोलकाता की टीम शेयर में काले धन का जम कर इस्तेमाल हुआ है वक्त आने पे सब पता चल जायेगा।ऐसे लोगो के लिए बाबा का ये कथन ही काफी है

दूसरी बात बाबा के समर्थन करने वालो से ....हम सभी समर्थको को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की जब हम अपने घर, पड़ोस, दफ्तर में भ्रष्टाचारी को बर्दाश्त करना बंद करेंगे और मौके पर न्याय करना शुरू करेंगे तब एक-एक कर भ्रष्टाचारी कम होंगे। जब देश का हर नागरिक आसपास किसी को रिश्वत लेते या देते देखते ही प्रतिक्रिया करना शुरू करेगा और बाकी लोग तुरंत उसके साथ खड़े होंगे, तब इस कैंसर के विरुद्ध असली क्रांति शुरू होगी। वन्देमातरम ! सत्यमेव जयते !
आप सभी के विचार आमंत्रित है - अजय कुमार दूबे