भगवत् कृपा हि केवलम् !

भगवत् कृपा हि केवलम् !

Monday, 31 January 2011

बापू अमर है.......वो मरे नहीं है........आज भी जिन्दा है !

३० जनवरी १९४८ के दिन महात्मा गाँधी की महज शारीरिक हत्या कर दी गयी, लेकिन बापू मरे नहीं। अपने विचारों और आदर्शों के साथ वो आज भी जिन्दा है। ६३ वर्ष बीत गए। इतनी लम्बी अवधि में एक पूरी पीढ़ी गुजर जाती है, राष्‍ट्र के जीवन में अनगिनत संघर्षों, संकल्पों और समीक्षाओं का दौर आता और जाता रहा। इतने उतार और चढाव के बावजूद अगर आज भी किसी का वजूद कायम है तों निश्चय ही उनमें कुछ तों चमत्कार होगा। बापू को इसी नजरिये से देखने की जरूरत है।

अपने भारत को आजादी दिलाने के बाद भी वे संतुष्‍ट नहीं थे। सत्ता से अलग रहकर वह एक और कठिन काम में लगे थे। वे देश की आर्थिक, सामाजिक और नैतिक आजादी के लिए एक नए संघर्ष की उधेड़बुन में थे। रामधुन, चरखा, चिंतन तथा प्रवचन उनकी दिनचर्या थी। एक दिन पहले ही उनकी प्रार्थना सभा के पास धमाका हुआ था लेकिन दुनिया का महानतम सत्याग्रही विचलित नहीं हुआ। वह स्वावलंबी भारत का स्वप्न देखते थे। वह गाँवों को अधिकार संपन्न, जागरूक तथा अंतिम व्यक्ति को भी देश का मजबूत आधार बनाना चाहते थे। जब दिल्ली में उनके कारण आई सरकार स्वरुप ले रही थी, स्वतंत्रता का जश्न मन रहा था, तब बापू दूर बंगाल में खून खराबा रोकने के लिए आमरण कर रहे थे। बापू की दिनचर्या में परिवर्तन नहीं, विचारों में लेशमात्र भटकाव नहीं, लम्बी लड़ाई के बाद भी थकान नहीं और लक्ष्य के प्रति तनिक भी उदारता नहीं। अहिंसा को सबसे बड़ा हथियार मानने वाले बापू निर्विकार भाव से अपनी यात्रा पर चले जा रहे थे की तभी एक अनजान हाथ प्रकट हुआ जो आजादी की लड़ाई में कही नहीं दिखा था, ना बापू के साथ, ना सुभाष के साथ और ना भगत सिंह के साथ। उस हाथ में थी अंग्रेजों की बनाई पिस्तोल, उससे निकाली अंग्रेजों की बनाई गोली, वह भी अंग्रेजों के दम दबा कर भाग जाने के बाद, तथाकथित हिन्दोस्तानी हाथ से। वह महापुरुष जिसके कारण इतनी बड़ी साम्राज्यवादी ताकत का सब कुछ छीन रहा था, फिर भी उनके शरीर पर एक खरोंच लगाने की हिम्मत नहीं कर पाई, जिस अफ्रीका की रंगभेदी सरकार भी बल प्रयोग नहीं कर सकी थी, उनके सीने में अंग्रेजो की गोली उतार दी एक सिरफिरे कायर ने। वह महापुरुष चला गया हे राम कहता हुआ। 
गाँधी जी के राम सत्ता और राजनीति के लिए इस्तेमाल होने वाले राम नहीं थे बल्कि व्यक्तिगत जीवन में आस्था तथा आदर्श के प्रेरणाश्रोत थे। गाँधी जी ‘ईश्वर- अल्ला तेरो नाम’ तथा ‘वैष्णवजन तों तेने कहिये प्रीत पराई जाने रे’; की तरफ सबको ले जाना चाहते थे। बापू के आदर्श राम, बुद्ध, महावीर, विवेकानंद तथा अरविन्द थे। हिटलर तथा मुसोलिनी को आदर्श मानने वाले उन्हें कैसे स्वीकार करते? गाँधी सत्य को जीवन का आदर्श मानते थे, झूठ को सौ बार सौ जगह बोल कर सच बनाने वाले उन्हें कैसे स्वीकार करते? शायद इसीलिए महात्मा के शरीर को मार दिया गया।
क्या इससे गाँधी सचमुच ख़त्म हो गए? बापू यदि ख़त्म हो गए तों मार्टिन लूथर किंग को प्रेरणा किसने दी? नेल्सन मंडेला ने किस की रोशनी के सहारे सारा जीवन जेल में बिता दिया, परन्तु अहिंसक आन्दोलन चलते रहे और अंत में विजयी हुए? दलाई लामा किस विश्वास पर लड़ रहे है इतने सालो से? खान अब्दुल गफ्फार खान अंतिम समय तक सीमान्त गाँधी कहलाने में क्यों गर्व महसूस करते रहे? अमरीका के राष्ट्रपति आज भी किसको आदर्श मानते है और दुनिया में बाकी लोगो को भी मानने की शिक्षा देते रहते है?
संयुक्त राष्ट्र संघ के सभा कक्ष से लेकर १४२ देशों की राजधानियों ने महात्मा गाँधी को जिन्दा रखा है। कही उनके नाम पर सड़क बनी, तों कही शोध या शिक्षा संस्थान और कुछ नहीं तों प्रतिमा तों जरूर लगी है।जिसको भारत में मिटाने का प्रयास किया गया, वह पूरी दुनिया में जिन्दा है। महान वैज्ञानिक आइन्स्टीन ने कहा कि आने वाली पीढियां शायद ही इस बात पर यकीन कर सकेंगी कि कभी पृथ्वी पर ऐसा हाड़ मांस का पुतला भी चला था। जिस नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को गाँधी के विरुद्ध बताया गया, उन्होंने जापान से महात्मा गाँधी को राष्‍ट्रपिता कह कर पुकारा तथा कहा कि यदि आजादी मिलती है तों वे चाहेंगे की देश की बागडोर राष्ट्रपिता  सम्हालें, वह स्वयं एक सिपाही की भूमिका में ही रहना चाहेंगे। परन्तु बापू को सत्ता नहीं, जनता की चिंता थी, उसकी तकलीफों की चिंता थी। 
उन्होंने कहा कि भूखे आदमी के सामने ईश्वर को रोटी के रूप में आना चाहिए। यह वाक्य मार्क्सवाद के आगे का है। उन्होंने कहा की आदतन खादी पहने, जिससे देश स्वदेशी तथा स्वावलंबन की दिशा में चल सके, लोगों को रोजगार मिल सके। नई तालीम के आधार पर लोगों को मुफ्त शिक्षा दी जाये। लोगों को लोकतंत्र और मताधिकार का महत्व समझाया जाये और उसके लिए प्रेरित किया जाये। उन्होंने सत्ता के विकेन्द्रीकरण, धर्म, मानवता, समाज और राष्‍ट्र सहित उन तमाम मुद्दों की तरफ लोगों का ध्यान खींचा जो आज भी ज्वलंत प्रश्न है।
वे और उनके विचार आज भी जिन्दा है और प्रासंगिक है। तभी तों जब अमरीका में बच्चो द्वारा अपने सहपाठियों को उत्तेजना तथा मनोरंजनवश गोलियों से भून देने की घटनाएँ कुछ वर्ष पूर्व हुई थी तों वहा की चिंतित सरकार ने बच्चो को बुलेटप्रूफ जैकेट नहीं बांटे, स्कूल के दरवाजो पर मेटल डिटेक्टर नहीं लगाये, हथियारों पर पाबन्दी नहीं लगे, बल्कि बच्चो को गाँधी की जीवनी, शिक्षा तथा विचार और उनके कार्य बताने का फैसला किया। उसी अमरीका में कुछ वर्ष पूर्व जब हिलेरी क्लिंटन ने बापू पर कोई हलकी बात कर दिया तों अमरीका के लोगों ने ही इतना विरोध किया कि चार दिन के अन्दर ही हिलेरी को खेद व्यक्त करना पड़ा।

गुजरात की घटनाओं के समय जब हैदराबाद में दो समुदाय के हजारों लोग आमने-सामने आँखों में खून तथा दिल में नफरत लेकर एकत्र हो गए, तों वहा दोनों समुदाय की मुट्ठी भर औरतें मानव शृंखला बना कर दोनों के बीच खड़ी हो गयी। यह गाँधी का बताया रास्ता ही तों था, वहा विचार के रूप में गाँधी ही तों खड़े थे। गुजरात में पिछले दिनों में राम, रहीम और गाँधी तीनों को पराजित करने की चेष्टा हुई, लेकिन हत्यारे ना गांधी के हो सकते है, ना राम के ना रहीम के। 
महत्मा गाँधी तों नहीं मरे, फिर हत्यारे ने मारा किसे था? ऐसे सिरफिरे लोग बापू को पिछले ६३ वर्षो से ख़तम नहीं कर पाए है ,और नाही कभी कामयाब हों पाएंगे। लेकिन जिम्मेदारी और जवाबदेही बापू को मानने वालो की भी है की सत्ता की ताकत से महात्मा गाँधी को बौना करने, उन्हें गाली देने और गोली मरने वालो से मानवता को बचाएं। रास्ता वही होगा जो गाँधी ने दिखाया था। ६३वा वर्ष जवाब चाहता है दोनों से की तुमने गाँधी को मारा क्यों था? उद्देश्य क्या था? तुम कहा तक पहुंचे? उनके मानने वालों से भी कि आर्थिक गैर बराबरी, सामाजिक गैर बराबरी के खिलाफ, नफ़रत और शोषण के खिलाफ बापू द्वारा छेड़ा गया युद्ध फैसलाकुन कब तक होगा? इन सवालों के साथ महात्मा गाँधी तथा उनके विचार आज भी जिन्दा है और कल भी हमारे बीच मौजूद रहेंगे।

राष्ट्रपिता बापू के ६३वी पुण्यतिथि (३० जनवरी) के अवसर पर भावभीनी श्रद्धांजलि.


आप सभी के विचार आमंत्रित है - अजय दूबे

47 comments:

अजय कुमार दूबे said...

बापू को नमन

Anonymous said...

बापू अमर है

उनको श्रद्धासुमन

सपना सिंह said...

बापू को भावभीनी श्रद्धांजलि..

सुन्दर लेख बापू के नाम
धन्यबाद

Anonymous said...

विश्व नेता महात्मा गाँधी अमर रहे
जय हिंद

सपना सिंह said...

वे और उनके विचार आज भी जिन्दा है और प्रासंगिक है।

संतोष शर्मा said...

महान वैज्ञानिक आइन्स्टीन ने कहा कि आने वाली पीढियां शायद ही इस बात पर यकीन कर सकेंगी कि कभी पृथ्वी पर ऐसा हाड़ मांस का पुतला भी चला था।

सच में बापू तो मरे ही नहीं ....उनको श्रद्धासुमन

संतोष शर्मा said...

अजय जी
सही कहा आपने बापू दुनिया भर में याद किये जाते रहेंगे . यहाँ काठमांडू में गांधीजी के नाम से कई स्कुल कालेज है और उनकी प्रतिमा और सड़क भी

Anonymous said...

अहिंसा के पुजारी को प्रणाम

अजय कुमार दूबे said...

संतोष जी बापू शताब्दी के महानायक थे

तभी पूरी दुनिया उनके विचार को मानती है

Anonymous said...

जय हिंद जय बापू

प्रीती मिश्रा said...

उन्होंने सत्ता के विकेन्द्रीकरण, धर्म, मानवता, समाज और राष्‍ट्र सहित उन तमाम मुद्दों की तरफ लोगों का ध्यान खींचा जो आज भी ज्वलंत प्रश्न है।


बापू को शत शत नमन

Anonymous said...

very good thought

rashtrapita ko namaan

Anonymous said...

nice post ..jai hind

पार्थ रावत said...

मै बापू के सभी विचारों से सहमत नहीं रहता हु पर उन्हें महानायक मानने में कोई संदेह नहीं रखता

बापू हमेशा याद किये जाते रहेंगे

पार्थ रावत said...

राष्ट्रपिता बापू ही हो सकते थे
और हुए भी

बापू को नमन

IERS said...

बापू अमर रहे ...

Anonymous said...

राष्ट्रपिता को प्रणाम

Punam said...

बापू हमेशा लोगो के लिए प्रेरणा स्त्रोत रहेंगे

उनको सादर नमन

अच्छा पोस्ट

Punam said...

बापू हमेशा लोगो के लिए प्रेरणा स्त्रोत रहेंगे

उनको सादर नमन

अच्छा पोस्ट

Anonymous said...

‘ईश्वर- अल्ला तेरो नाम’

महात्मा को सलाम

Anonymous said...

युगपुरुष गाँधी जी अमर रहेंगे

Anonymous said...

महत्मा गाँधी तों नहीं मरे, फिर हत्यारे ने मारा किसे था?

naman

Deepak Saini said...

बापू को भावभीनी श्रद्धांजलि..

सुन्दर लेख बापू के नाम
धन्यबाद

Anonymous said...

श्रद्धांजलि...बापू को

Anonymous said...

बेहतरीन, दिल को छू गया.

Anonymous said...

आज के दिन गाँधी जी को विनम्र श्रद्धांजलि .....जानकारी पूर्ण लेख

Patali-The-Village said...

जानकारी पूर्ण लेख|गाँधी जी को विनम्र श्रद्धांजलि|

Narendra said...

राष्ट्रपिता को शत शत नमन

Narendra said...

बापू की प्रशंगिकता हमेशा बनी रहेगी
बापू के विचार अमर है

Anonymous said...

लेकिन गाँधी जी क्रांतिकारियों के साथ नहीं थे

जबकि क्रन्तिकारी देश के लिए कुर्बानिय दे रहे थे

Narendra said...

बेनामी साहब ये आपकी गलत फ़हमी है बापू सभी क्रांतिकारियों के लिए भी प्रेरणा स्त्रोत थे

सभी क्रन्तिकारी उनका आदर करते थे

अजय कुमार दूबे said...

हा नरेन्द्र
बापू ने करो या मरो के नारा देते समय कहा था
मै आजादी पाने के लिए सत्य और आहिंसा पे सबसे ज्यादा विश्वाश रखता हु पर अगर कोई और रास्ता चुनना चाहे आपनी भारत माता को आजाद करने के लिए तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है मुझे तो आपति उनसे है जो कायर है और कोई रास्ता नहीं चुनना चाहते

ये वचन पर्याप्त है बापू का इस शंदर्भ में, तभी तो हरकोई बापू का सम्मान करता था

अजय कुमार दूबे said...

मेरा तो मानना है की बापू का अपमान करना क्रांतिकारियों के भी अपमान करने के सामान है

खुद सुभाष बाबु ने उन्हें राष्ट्रपिता कहा था

Anonymous said...

आज की पीढ़ी बापू के बारे में कम जानती है इस वजह से......आलोचना करने लगती है

अजय कुमार दूबे said...

बापू तो कहते थे आलोचक हमारे सबसे अछे मित्र है
ये लाइन NCERT के भवन पे लिखी है.

बापू को बदनाम उनके नाम को इस्तेमाल करने वाले कर रहे है इन झूठे गांधीवादियों के वजह से बापू का नाम ख़राब होता है , ये तथाकथित गांधीवादी खुद बापू के किसी सिधांत का ध्यान नहीं रखते

अजय कुमार दूबे said...
This comment has been removed by the author.
Narendra said...

बहुत अच्छी जानकारी प्राप्त हुई आज तो

आपका बहुत बहुत धन्यबाद अजय जी

Narendra said...

बापू की आलोचना वो करता है जो बापू को ठीक से नहीं जनता ...माना की कोई जरूरी नहीं की हर बात से हम बापू से सहमत हो पर उनकी बुराई करने का किसी को हक़ नहीं है

अजय जी मै खुद पहले बापू की बुराई करता था पर अब खुद पे शर्मिंदा हु . जबसे बापू को ठीक से पढ़ा उनका कायल हो गया हु

तब माउन्ट बेटन ने ठीक ही कहा था " सारा संसार उनके जीवित रहने से सम्पन्न था और उनके निधन से वह दरिद्र हो गया "

अजय कुमार दूबे said...

महा कवि पंत ने कहा था

तुम मांसहीन, तुम रक्त हीन, हे अस्थिशेष! तुम अस्थिहीऩ,

तुम शुद्ध बुद्ध आत्मा केवल, हे चिर पुरान हे चिर नवीन !

तुम पूर्ण इकाई जीवन की, जिसमें असार भव-शून्य लीन,

आधार अमर, होगी जिस पर, भावी संस्कृति समासीन।

अजय कुमार दूबे said...

बापू की यादे हमशे बाटने के लिए आप सभी का दिल से आभार


धन्यबाद

Narendra said...

एक बार फिर से आपको भी इस शानदार पोस्ट के लिए साधुवाद

Anonymous said...

महात्मा को बारम्बार नमन

Anonymous said...

अहिंसा के पुजारी को नमन

अहसास की परतें - समीक्षा said...

A nice post.

Kindly visit http://ahsaskiparten-sameexa.blogspot.com/

शिवकुमार ( शिवा) said...

सुन्दर लेख बापू के नाम
धन्यबाद

chandra said...

bapu ko pranam

Ashok Arya said...

कुछ लोग कहते है की देश को आजादी इसने दिलाई उसने दिलाई | लेकिन असल बात तो यह है की देश को आजादी उस वक्त के माहौल ने दिलाई |
जब भारत आजाद हुआ उसके ठीक पहले दूसरा विश्व युद्ध छिड़ा था, जिसने ब्रिटेन की शक्ति को क्षीण कर दिया | अब ब्रिटेन के पास न तो धन बचा, न ही इतना सामर्थ की वो भारत जैसे बड़े देश को संभाल सके | इसलिए ब्रिटेन ने जल्द से जल्द देश को आजादी देने का फैसला किया |
हा हम आजादी में सुभाष चन्द्र बोस और महात्मा गाँधी के प्रभाव को भी नजर अंदाज नहीं कर सकते | जब गाँधीजी ने नमक कानून तोड़ा उस वक्त सारी दुनिया में इस आन्दोलन की चर्चा हुई, और कई देश ब्रिटेन की क्रूरता और नाइंसाफी के खिलाफ बोलने लगे थे | आजादी में यह अंतर्राष्ट्रीय दबाव भी बहुत मायने रखता है | जब गांधीजी ब्रिटेन गए तब उन्होंने वहा के लोगो से मेलजोल बडाया और वह वहा की मीडिया में छाये रहे | उनके करिश्माई व्यक्तित्व की वजह से अब खुद ब्रिटेन वासी भी भारत की आजादी का समर्थन करने लगे थे |
जहा तक नेताजी का सवाल है तो यह सच है की ब्रिटेन उन्हें उस वक्त सबसे बड़े खतरे के रूप में देखती थी | और जिस प्रकार सुभाष चन्द्र बोस के नेतृत्व में अंग्रेज हुकूमत में भर्ती हुए सैनिक ही अंग्रेजो के खिलाफ खड़े हो गए, ये उनके लिए बहुत ही चिंता की बात थी | लेकिन यह थी सच है की नेताजी को महात्मा गाँधी से ही प्रेरणा और पहचान मिली थी |
आखिर में यही कहूँगा की हालाँकि इन लोगो ने दिश के लिए बहुत कुछ किया लेकिन आजादी में सबसे अहम भूमिका तो दुसरे विश्व युद्ध की ही थी |