भगवत् कृपा हि केवलम् !

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Thursday, 3 February 2011

अली बाबा और चालीस चोर ............

मै जब छोटा था तो अली बाबा और चालीस चोर की कहानी पहली बार अपनी अम्मा से सुना था । इस साल के शुरू में ही पहले उत्तरी अफ़्रीका के एक  देश ट्यूनिशिया में राजकीय तख़्ता पलट फिर मिस्र में तेज होती क्रांति और अब लपेटे में आते अन्य अरब मुस्लिम देश जैसे अल्जीरिया, जोर्डन और अब यमन में भी क्रांति शुरू हो गयी है। ऐसे में मुझे बचपन की सुनी उसी मजेदार कहानी का शीर्षक  "अली बाबा चालीस चोर " अचानक से याद आने लगा है। ट्यूनिशिया में जो बड़े बड़े प्रदर्शन हुए जिन के फलस्वरूप सत्ता परिवर्तन हुआ और राष्ट्रपति ज़िन अल अबिदीन बेन अली देश को छोड़ कर भाग गए। हम कह सकते है अली बाबा (बेन अली) तो गए क्या अब अरब जगत के चालीस चोरों की बारी है......??

अब चालीस चोरों की बारी है ...अली बाबा तो गए

अली बाबा तो गए ट्यूनीशिया से लेकर मिस्र तक परिवर्तन की नई लहर ने लोगों में नई उम्मीदें जगा दी हैं। हालांकि अभी यह कहना गलत होगा कि यह क्रांति अरब जगत को कहां ले जाएगी??
अरब जगत में परिवर्तन की लहर के आगे दमनकारी सत्ताएं लड़खड़ाने लगी हैं। क्रांन्ति तेजी से फैल रही है। ट्यूनीशिया से शुरू हुई यह क्रांति अब मध्य-पूर्व के ह्रदय मिस्र तक पहुंच गई है।मिस्र एक कमल क्रांति से गुजर रहा है। वैसे तो पूरा अरब जगत उबल रहा है, लेकिन ट्यूनीशिया से लेकर अल्जीरिया, यमन, जोर्डन और मिस्र में लोगों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। ऐसा लगता है कि ट्यूनीशियाई राष्ट्रपति बेन अली के बाद अब मिस्र के राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक के तख्त और ताज को उछाले जाने की बारी आ गई है।पूरे मिस्र में जिस तरह से लोग मुबारक सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं, उसे देखते हुए यह साफ हो गया है कि मुबारक अब कुछ दिनों के ही मेहमान हैं।पिछले कुछ दिनों से राजधानी काहिरा में विद्रोह की स्थिति है जो दिन पर दिन और ताकतवर होता जा रहा है। कफ्र्यू और सैनिक टैंकों की मौजूदगी के बावजूद हजारों-लाखों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। वे राष्ट्रपति होस्नी मुबारक के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। ऐसे ही प्रदर्शनों की खबरें पूरे देश से आ रही है।पिछले तीस साल से मिस्र की सत्ता पर कब्जा किए बैठे मुबारक के पास अब विकल्प नहीं रह गए हैं। किसी भी अन्य तानाशाह की तरह मुबारक भी लोगों पर गोलियां चलवा सकते हैं, सेना को उतारकर नरसंहार करवा सकते हैं, लेकिन शुक्रवार के प्रदर्शनों से साफ हो गया है कि लोगों में अब दमन का डर खत्म हो गया है। वे हर कुरबानी देने के लिए तैयार हैं।कहने की जरूरत नहीं है कि ऐसे हालात में सेना और पुलिस के पास भी कोई खास विकल्प नहीं रह जाते है। जब आम लोग सड़कों पर उतर आते हैं, तो दमनकारी सत्ताओं का दमन भी जवाब देने लगता है। ट्यूनीशिया में यही हुआ, जब लोग सड़कों पर उतर आए और उन्होंने पीछे हटने से इंकार कर दिया, तो सेना ने भी उनपर गोलियां चलाने से मना कर दिया। नतीजा बेन अली को देश छोड़कर भागना पड़ा।इस घटना ने सोए हुए अरब जगत, खास कर मिस्र को जगा दिया है। मिस्र में लोगों खास तौर पर, नौजवानों को यह महसूस हुआ कि जब छोटे से देश ट्यूनीशिया के लोग बेन अली के पुलिस राज को चुनौती दे, सकते हैं तो वे क्यों नहीं?कहते हैं कि मिस्र के लोगों में बहुत सब्र है। पिछले तीस साल से वे मुबारक को झेल रहे हैं, लेकिन सहने की भी एक सीमा होती है।


दोहराने की जरूरत नहीं है कि मुबारक के नेतृत्व में मिस्र राजनीतिक रूप से अमेरिकी कठपुतली बन गया है। लोकतंत्र के नाम पर सिर्फ चुनाव का धोखा है। न बोलने की आज़ादी है और न अपने हकों के लिए गोलबंद होने की। एक तरह का पुलिस राज है जहां विरोध का मतलब जेल, पुलिसिया उत्पीड़न और मौत है। ऊपर से बेरोजगारी और महंगाई आसमान छू रही है। नौजवानों के सामने कोई भविष्य नहीं है। लेकिन जब से लोगों को पता चला है कि मुबारक अपने बेटे गमाल को राष्ट्रपति बनाने की तैयारी कर रहे हैं, उनका धैर्य जवाब दे गया है। खासकर नौजवानों का गुस्सा फूट पड़ा है। ऐसा लगता है कि सैनिक और पुलिस ताकत के बल पर जबरन लोगों का मुंह बंद रखने और हर तरह के विरोध को कुचल देने वाली मुबारक हुकूमत ने मिस्र में जिस तरह राज कायम रखा था, उसकी सीवन उधड़ने लगी है। कहने की जरुरत नहीं है कि ट्यूनीशिया से लेकर मिस्र तक परिवर्तन की इस नई लहर ने लोगों में नई उम्मीदें जगा दी हैं। हालांकि अभी यह कहना थोड़ी जल्दी होगी कि यह क्रांति अरब जगत को कहां ले जायेगी? लेकिन इतना तय है कि अरब जगत में लोग परिवर्तन चाहते हैं। आइये, इसका स्वागत करें।

आप क्या सोचते है ?? - अजय दूबे

83 comments:

अजय कुमार दूबे said...

आप क्या सोचते है जरूर बताइए

आपके विचार आमंत्रित है

Bhushan said...

बहुत बढ़िया जानकारी दी गई है. अरब देश प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकेंगे ऐसा लगता है.

कौशलेन्द्र said...

बिलकुल दुबे जी ! अरब जगत में यह परिवर्तन अब होकर रहेगा ..हम स्वागत करते हैं इस रक्तहीन क्रान्ति का ....और आह्वान करते हैं अपने देशवासियों का भी की किसी भी तरह के अन्याय को सहने की आवश्यकता नहीं है ...भ्रष्टाचार के खिलाफ हमें भी लामबंद होने की आवश्यकता है.

Deepak Saini said...

आवाम आखिर कब तक जुल्म सहेगा, एक ना एक दिन तो उकसा गुस्सा फूटना ही था सो क्रान्ति की लहर दौड गयी है तो जुल्मी का नाश निश्चित है

Anonymous said...

very good post

Anonymous said...

sundar ati sundar

Anonymous said...

निश्चय ही ये सही बदलाव की बयार है

और हम सबको इसका स्वागत करना चाहिए

अजय कुमार दूबे said...

हा भूषण जी प्रभाव तो पड़ने भी लगा है

अजय कुमार दूबे said...

कौशलेन्द्र जी,दीपक जी

पिछले तीस साल से वे मुबारक को झेल रहे हैं, लेकिन सहने की भी एक सीमा होती है।

Anonymous said...

क्रांति तो अपने देश में भी होनी चाहिए भ्रस्ताचार के खिलाफ

अछि जानकारी

संतोष शर्मा said...

अजय जी क्या बात है ....

आपने तो बड़े ही शानदार तरीके से आपनी बाते कही है ...खासकर आपके लेख का शीर्षक गजब का है

"अली बाबा चालीस चोर "

धन्यबाद

संतोष शर्मा said...

अजय जी हा
हम भी कह सकते है अली बाबा (बेन अली) तो गए क्या अब अरब जगत के चालीस चोरों की बारी है......??

भगवान आपके अंदाजा को सही करे

आभार

Anonymous said...

अरब में अभी चालीस ऐसे चोर है ???

तब तो सालो की गयी

हेहेहेहेहे

संतोष शर्मा said...

@कौशलेन्द्र जी

आपके विचार का भी समर्थन करता हु .

Anonymous said...

आजतक कोई जनांदोलन गलत नहीं रहा

निश्चय ही ये भी स्वागतयोग्य है
बेहतरीन लेख

संतोष शर्मा said...

पिछले तीस साल से मिस्र की सत्ता पर कब्जा किए बैठे मुबारक के पास अब विकल्प नहीं रह गए हैं।

अजय कुमार दूबे said...

हा संतोष जी अब तो लगता है मुबारक को आपना देश भी छोड़ना पड़े अलीबाबा की तरह

मेरे उत्साह वर्धन के लिए आपका आभार

Anonymous said...

अली बाबा और चालीस चोर

Anonymous said...

HUM BHI SWAGAT KARTE HAI

सपना सिंह said...

इस जनांदोलन का पूरी दुनिया से समर्थन मिलना चाहिए और सम्मान भी

धन्यबाद

सपना सिंह said...
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Anonymous said...

शाबास आवाम ...शाबाश अजय

सपना सिंह said...

काफी पैनी निगाह है आपकी इस पुरे घटनाक्रम पर

काफी जानकारी भरा पोस्ट
धन्यबाद

अजय कुमार दूबे said...

जब आम लोग सड़कों पर उतर आते हैं, तो दमनकारी सत्ताओं का दमन भी जवाब देने लगता है।

Punam said...

अजय जी

बहुत ही सुन्दर पोस्ट इस घटनाक्रम में

धन्यबाद

Punam said...

अब तो हमे भी अलीबाबा चालीस चोर की कहानी याद आने लगी
पहले लगा था आप वही पुराणी कहानी सुनाने जा रहे है पर जब पढ़ी तो और भी अच्छी .....नयी कहानी
THANKS

सपना सिंह said...

पूनम आप की तरह मै भी पहले सोची की आखिर अली बाबा की कहानी कियु पढ़े वो तो जानते ही है

पर अच्छा हुआ जो पढ़े यहाँ तो नए ज़माने के चोरो का हाल था

Punam said...

@सपनाजी
पुरे लेख से सहमत हु बस एक फर्क है की मैंने अली बाबा चालीस चोर की कहानी आपनी दादी से सुनी थी

अजय कुमार दूबे said...

धन्यवाद पूनम जी

धन्यवाद सपना जी

Anonymous said...

अब मुबारक भी गया .....

यमन में विरोध प्रदर्शन तेज़

बहुत बहुत स्वागत

Anonymous said...

nice post

chandra said...

बढ़िया लेख ...

Anonymous said...

हा हम भी मिस्र के जनता के साथ है

Anonymous said...

Perhaps the Misri junta have forgotten the fact that what happened in Iraq after the exit of Saddam Hussain,many innocent people over there killed perhaps in millions and for all this accountability lies on america,britain and israel.And the same thing unfortunately is happening in Egypt.And we should not forget that even after regime change nothing is going to improve peoples' life,unemployment,deep rooted corruptions,and other social malaise continues to remain there.And I am totally against such things and behind all this drama of what's happening there starts with the Coptic Church bombing in Alexandaria wherein some bloody christu have died and that too was the handiwork of zionists.Coptic nexus with corrupt people around the region snowballed into such grave crisis.Christu have just one bloody agenda to disturb the third world and destroy their economy thus become easy to convert

Anonymous said...

डाबर , मैरिको , इमामी जैसी भारतीय कंपनियों ने इजिप्ट में मौजूदा हालात को देखते हुए वहां अपने प्लांट बंद कर दिए हैं। ये माहौल का जायजा ले रहे हैं। इसी तरह बीपी , ट्रांसओशन और डायमंड ऑफशोर ड्रिलिंग इंक समेत कई एनर्जी कंपनियों ने भी इजिप्ट में अपना काम रोक दिया है।

पार्थ रावत said...

मिस्र के राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक ने अपने खिलाफ हो रहे जबर्दस्त विरोध प्रदर्शनों के आगे घुटने टेकते हुए कहा कि वह आगे राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव नहीं लड़ेंगे। मिस्र में सितंबर में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं। उधर, मिस्र में लोग मुबारक के इस्तीफे से कम पर कतई राजी नहीं हैं।

पार्थ रावत said...

एक और शानदार पोस्ट के लिए आपको धन्यबाद अजय जी

शीर्षक बहुत ही सटीक है

Narendra said...

नए वर्ष में लोगो का नए सोच के साथ बढ़ना प्रसंसनीय है

बहुत ही स्वागत योग्य कदम है वह के जनता की

पार्थ रावत said...

अभी तो एक से एक लुटेरे पड़े है पर शुरुवात अच्छी है
शानदार आगाज

Narendra said...

हमें भी भ्रष्टाचार के खिलाफ लामबंद होना चाहिए

Black mony वापस आपने देश में मंगवाने के लिए सरकार पे जनता का दबाब जरूरी है

पार्थ रावत said...

भारत में बदलाव से काम नहीं चलेगा
यहाँ तो आप बदलेंगे किससे कालाधन तो सभी पार्टी के नेताओ का है वो भला कियु लाना चाहेंगे वापस

ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ही कुछ कर सकता है

Narendra said...

@पार्थ जी जो भी हो इस दशक में बहुत कुछ बदलने वाला है ऐसा लगने लगा है

और एक न एक दिन काला धन भी वापस आपने देश जरूर आएगा

@अजय जी मुबारक के बाद अब कितने बचेंगे 39

पार्थ रावत said...

@narenda

अजय का मतलब मुहाबरे से है जो यहाँ फिट बैठता है ३९ से ज्यादा भी हो सकते है चोर या कम भी

हा अब बाकियों की बारी है बचना है तो सुधर जाये
वरना .....पब्लिक सब जानती है

संतोष शर्मा said...

अरब में तो और भी दमनकारी शासन है ...

@पार्थ जी जब आम लोग सड़कों पर उतर आते हैं, तो दमनकारी सत्ताओं का दमन भी जवाब देने लगता है। ट्यूनीशिया में यही हुआ, जब लोग सड़कों पर उतर आए और उन्होंने पीछे हटने से इंकार कर दिया, तो सेना ने भी उनपर गोलियां चलाने से मना कर दिया।

Narendra said...

@ santosh ji

पर डर बस इस बात का है की अमेरिका इसका लाभ न उठाले वो बहुत चालक देश है

संतोष शर्मा said...

@नरेन्द्र जी

अमेरिका तो वैसे भी मुबारक के साथ था ....पर अब ओबामा कहता है जनता के साथ है

हर देश में जबरजस्ती दखल करता है US
खैर अभी वह जनता को मुबारक से छुटकारा चाहिए

Anonymous said...

very good

good thought

संतोष शर्मा said...
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Anonymous said...

सही कदम

Narendra said...

@ parth ji

@ santosh ji

आपलोगों का बहुत धन्यबाद चर्चा के लिए
अजय जी आपके अगले पोस्ट का इंतज़ार रहेगा
धन्यबाद

संतोष शर्मा said...
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Anonymous said...

इसे कहते है जनता की ताक़त, अरे भारत के बाईमान नेताओ तुम भी सुधर जाओ| क्योकि भारत की जनता मिस्त्र की जनता से जयदा बुरा हाल करेगी तुम बाईमान नेताओ का|

अजय कुमार दूबे said...

@बेनामी जी अपना नाम तो बताओ भाई

भारत में बग़ावत की कोई ज़रूरत नही है यहाँ कोई नेता ऐसा नहीं है जिस पर विस्वास किया जाए हाँ सुधार की ज़रूरत है जिस मुल्क में बग़ावत होती है वो मुल्क तबाह और बर्बाद हो जाता है और अच्छे लोग सुधार पसंद करते हैं आप एक अच्छे इंसान हैं संयम रखें धन्यवाद

प्रीती मिश्रा said...

बहुत ही सुन्दर पोस्ट ...आभार

आपकी कहानी अच्छी थी इसका प्रभाव तो औरो पे पड़ेगा ही

@अजय जी

पर वहा लोगो के सुरक्षा का संकट भी खड़ा हो सकता है

अजय कुमार दूबे said...

@priti
'इजिप्ट के महान नागरिकों आपकी सशस्त्र सेनाएं जनता के वाजिब हकों को पहचानती हैं। हमने इजिप्ट के लोगों के खिलाफ न कभी ताकत का इस्तेमाल किया है न करेंगे। आपकी सेनाएं जानती हैं कि आपकी मांगें जायज हैं। हमारी इच्छा है कि हम देश और उसकी जनता को बचाने की जिम्मेदारी उठाएं। हम वचन देते हैं कि हर कोई शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात कह सकेगा।' ये इजिप्ट की सेना की तरफ से आया बयान है.. ये बयान इतिहास की धरोहर है.. दुनिया के तमाम तानाशाहों के लिए एक चेतावनी है.. तमाम जहाँ की सेनाओं के लिए आदर्श बयान है..

प्रीती मिश्रा said...

अजय इस बयान को भी पोस्ट(लेख)में लिखना चाहिए था . ये तो और भी स्वागत योग्य बयान है

जानकारी के लिए धन्यबाद

Anonymous said...

भारतवासी मिस्त्र की जनता से कुछ प्रेरणा लें और अपने देश में भी फैली अराजकता, महँगाई,घोटलेबाजों को सत्ता से दूर करने के लिए ऐसे कदम उठाए.इसके लिए ज़रूरी है किसी ऐसे संघटन का सपोर्ट जो जनता का हॉंसला बढ़ाए, जैसा मिस्त्र की आर्मी ने जनता का साथ देने का फ़ैसला किया.

Anonymous said...

भारतवासी मिस्त्र की जनता से कुछ प्रेरणा लें और अपने देश में भी फैली अराजकता, महँगाई,घोटलेबाजों को सत्ता से दूर करने के लिए ऐसे कदम उठाए.इसके लिए ज़रूरी है किसी ऐसे संघटन का सपोर्ट जो जनता का हॉंसला बढ़ाए, जैसा मिस्त्र की आर्मी ने जनता का साथ देने का फ़ैसला किया.

Anonymous said...

ऐसा ही कुछ भारत में भी होना चाहिए तब ही इन भ्रष्ट नेताओ और सरकारी लोगो से मुक्ति मिलेगी. मैं दुआ करता हूँ की भारत की जनता भी जल्द से जल्द जागे.

Anonymous said...

ऐसा ही कुछ भारत में भी होना चाहिए तब ही इन भ्रष्ट नेताओ और सरकारी लोगो से मुक्ति मिलेगी. मैं दुआ करता हूँ की भारत की जनता भी जल्द से जल्द जागे.

Anonymous said...

भारत में भी ऐसी ही बग़ावत की ज़रूरत है, कोई आएगा मेरे साथ.9911564282
anil9gupta@gmail.com

Anonymous said...
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Anonymous said...

बराबर यही होना चाहिए।

Anonymous said...

सब अमेरिक़ी खेल है

Anonymous said...

सूडान , सीरिया यहाँ भी बड़कने लगी है आग

अजय कुमार दूबे said...

करीब 30 साल से शासन कर रहे मिस्र के राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक और उनके परिवार की कुल संपत्ति करीब 65 बिलियन डॉलर (2925 अरब रुपए) आंकी गई है। एक संस्थान आईएचए ग्लोबल इनसाइड के अनुसार मुबारक के परिवार की लंदन, पेरिस, मेड्रिड, दुबई, वाशिंगटन, न्यूयार्क और फ्रेंकफुर्ट सहित कई स्थानों पर अरबों रुपए मूल्य की चल-अचल में संपत्ति है।

Anonymous said...

persident ko resigm karna chahiye.kyunki misr ki aam janta unhe pasand nahi kar rahi hai.

Anonymous said...

the politician should resign at thier own so that the public will not suffer the negativities of the "Bagaawat".but if this does not happen then people should force political party to decline and do BAGAAWAT,like it is happening in kahira at present.

Anonymous said...

हमारे यहां 64 सालो से एक परिवार विदा नही ले रहा है उसे भी विदा करना होगा

Anonymous said...

हमारे राजनेता सबक ले. एक दिन भारत की जनता भी रास्ते पर आएगी. वोट तुष्टिकरण नीति को त्यागना ज़रूरी है. सहनशीलता की भी सीमा होती है.

Anonymous said...

ndia do not wait, learn a lesson from small countries

Anonymous said...

good write

Anonymous said...

mujhe lagta hai ...bahut bhari asar hoga es janandolan ka

Patali-The-Village said...

बहुत बढ़िया जानकारी दी गई है| अरब देश प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकेंगे ऐसा लगता है|

Anonymous said...

ये महज़ अरब तक ही सीमित करके नहीं देखा जा सकता है. दुनियां में जहां भी शासक जनता की भावनाओं की क़द्र नहीं करेगा वहां यही होगा.

Anonymous said...

ये अय्याश और अमरीका परस्त अरबी शासकों के ख़िलाफ़ जनता का दबा हुआ ग़ुस्सा है जो अब सामने आ रहा है.

Anonymous said...

जनता की रोके राह, समय में ताव कहाँ
वह जिधर चाहती काल उधर ही मुड़ता है.
मेरा विश्वाश है कि अरब की जनता की प्रबल इच्छाशक्ति अरब को भी बदलकर रखेगी.
अरब की जनता को हमारी शुभकामनाऍ.

Anonymous said...

जनाब, इस्लाम और लोकतंत्र साथ साथ नहीं चल सकता है, वहाँ कोई और तानाशाह आ जाएगा.

Indar Hooda

Anonymous said...

मिस्र में जो कुछ भी किया जा रहा है, उसका दुनिया में अच्छा प्रभाव होगा, लेकिन यहाँ निराशाजनक है कि आंदोलन के खलनायक मुबारक को जनता कोई विकल्प नहीं सुझा पाई है. आंदोलन की उपलब्धियों को चार चांद लग जाते यदि नायक, निर्देशक और पटकथा लेखक बिल्कुल साफ़ साफ़ होतीं.

Anonymous said...

मिस्र के जन उबाल का अरब जगत में क्या असर होगा, यह अनुमान लगाना अभी कठिन है. लेकिन ट्यूनीशिया या मिस्र में जो कुछ भी हो रहा है, वहाँ केवल दमन और शोषण की प्रक्रिया के ख़िलाफ़ आवाज़ है. केवल विरोध करना एक क़दम हो सकता है लेकिन जब तक निर्माण की तस्वीर सामने नहीं आती तब तक बाजी आसानी से पलट सकती है.

naval joshi

Rajesh R. Singh said...

अंजाम देखा आपने
हुस्ने मुबारक का

था मिस्र का भी वही
जो है हाल भारत का

परजीवियों के राज का
तख्ता पलट कर दो

जन में नई क्रांति का
जोश अब भर दो

उठो आओ हिम्मत करो
क्रांति का परचम धरो

मत भूलो यह सरोकार
अच्छा है मानवाधिकार

राजेश सिंह

अजय कुमार दूबे said...

धन्यबाद राजेश जी

भारत में बग़ावत की कोई ज़रूरत नही है यहाँ कोई नेता ऐसा नहीं है जिस पर विश्वाश किया जाए हाँ सुधार की ज़रूरत है जिस मुल्क में बग़ावत होती है वो मुल्क तबाह और बर्बाद हो जाता है और अच्छे लोग सुधार पसंद करते हैं आप एक अच्छे इंसान हैं संयम रखें धन्यवाद

Vazquezfloz said...

ऐसा ही कुछ भारत में भी होना चाहिए तब ही इन भ्रष्ट नेताओ और सरकारी लोगो से मुक्ति मिलेगी. मैं दुआ करता हूँ की भारत की जनता भी जल्द से जल्द जागे.