
अब चालीस चोरों की बारी है ...अली बाबा तो गए

अरब जगत में परिवर्तन की लहर के आगे दमनकारी सत्ताएं लड़खड़ाने लगी हैं। क्रांन्ति तेजी से फैल रही है। ट्यूनीशिया से शुरू हुई यह क्रांति अब मध्य-पूर्व के ह्रदय मिस्र तक पहुंच गई है।मिस्र एक कमल क्रांति से गुजर रहा है। वैसे तो पूरा अरब जगत उबल रहा है, लेकिन ट्यूनीशिया से लेकर अल्जीरिया, यमन, जोर्डन और मिस्र में लोगों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। ऐसा लगता है कि ट्यूनीशियाई राष्ट्रपति बेन अली के बाद अब मिस्र के राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक के तख्त और ताज को उछाले जाने की बारी आ गई है।पूरे मिस्र में जिस तरह से लोग मुबारक सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं, उसे देखते हुए यह साफ हो गया है कि मुबारक अब कुछ दिनों के ही मेहमान हैं।पिछले कुछ दिनों से राजधानी काहिरा में विद्रोह की स्थिति है जो दिन पर दिन और ताकतवर होता जा रहा है। कफ्र्यू और सैनिक टैंकों की मौजूदगी के बावजूद हजारों-लाखों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। वे राष्ट्रपति होस्नी मुबारक के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। ऐसे ही प्रदर्शनों की खबरें पूरे देश से आ रही है।पिछले तीस साल से मिस्र की सत्ता पर कब्जा किए बैठे मुबारक के पास अब विकल्प नहीं रह गए हैं। किसी भी अन्य तानाशाह की तरह मुबारक भी लोगों पर गोलियां चलवा सकते हैं, सेना को उतारकर नरसंहार करवा सकते हैं, लेकिन शुक्रवार के प्रदर्शनों से साफ हो गया है कि लोगों में अब दमन का डर खत्म हो गया है। वे हर कुरबानी देने के लिए तैयार हैं।कहने की जरूरत नहीं है कि ऐसे हालात में सेना और पुलिस के पास भी कोई खास विकल्प नहीं रह जाते है। जब आम लोग सड़कों पर उतर आते हैं, तो दमनकारी सत्ताओं का दमन भी जवाब देने लगता है। ट्यूनीशिया में यही हुआ, जब लोग सड़कों पर उतर आए और उन्होंने पीछे हटने से इंकार कर दिया, तो सेना ने भी उनपर गोलियां चलाने से मना कर दिया। नतीजा बेन अली को देश छोड़कर भागना पड़ा।इस घटना ने सोए हुए अरब जगत, खास कर मिस्र को जगा दिया है। मिस्र में लोगों खास तौर पर, नौजवानों को यह महसूस हुआ कि जब छोटे से देश ट्यूनीशिया के लोग बेन अली के पुलिस राज को चुनौती दे, सकते हैं तो वे क्यों नहीं?कहते हैं कि मिस्र के लोगों में बहुत सब्र है। पिछले तीस साल से वे मुबारक को झेल रहे हैं, लेकिन सहने की भी एक सीमा होती है।
दोहराने की जरूरत नहीं है कि मुबारक के नेतृत्व में मिस्र राजनीतिक रूप से अमेरिकी कठपुतली बन गया है। लोकतंत्र के नाम पर सिर्फ चुनाव का धोखा है। न बोलने की आज़ादी है और न अपने हकों के लिए गोलबंद होने की। एक तरह का पुलिस राज है जहां विरोध का मतलब जेल, पुलिसिया उत्पीड़न और मौत है। ऊपर से बेरोजगारी और महंगाई आसमान छू रही है। नौजवानों के सामने कोई भविष्य नहीं है। लेकिन जब से लोगों को पता चला है कि मुबारक अपने बेटे गमाल को राष्ट्रपति बनाने की तैयारी कर रहे हैं, उनका धैर्य जवाब दे गया है। खासकर नौजवानों का गुस्सा फूट पड़ा है। ऐसा लगता है कि सैनिक और पुलिस ताकत के बल पर जबरन लोगों का मुंह बंद रखने और हर तरह के विरोध को कुचल देने वाली मुबारक हुकूमत ने मिस्र में जिस तरह राज कायम रखा था, उसकी सीवन उधड़ने लगी है। कहने की जरुरत नहीं है कि ट्यूनीशिया से लेकर मिस्र तक परिवर्तन की इस नई लहर ने लोगों में नई उम्मीदें जगा दी हैं। हालांकि अभी यह कहना थोड़ी जल्दी होगी कि यह क्रांति अरब जगत को कहां ले जायेगी? लेकिन इतना तय है कि अरब जगत में लोग परिवर्तन चाहते हैं। आइये, इसका स्वागत करें।
आप क्या सोचते है ?? - अजय दूबे
83 comments:
आप क्या सोचते है जरूर बताइए
आपके विचार आमंत्रित है
बहुत बढ़िया जानकारी दी गई है. अरब देश प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकेंगे ऐसा लगता है.
बिलकुल दुबे जी ! अरब जगत में यह परिवर्तन अब होकर रहेगा ..हम स्वागत करते हैं इस रक्तहीन क्रान्ति का ....और आह्वान करते हैं अपने देशवासियों का भी की किसी भी तरह के अन्याय को सहने की आवश्यकता नहीं है ...भ्रष्टाचार के खिलाफ हमें भी लामबंद होने की आवश्यकता है.
आवाम आखिर कब तक जुल्म सहेगा, एक ना एक दिन तो उकसा गुस्सा फूटना ही था सो क्रान्ति की लहर दौड गयी है तो जुल्मी का नाश निश्चित है
very good post
sundar ati sundar
निश्चय ही ये सही बदलाव की बयार है
और हम सबको इसका स्वागत करना चाहिए
हा भूषण जी प्रभाव तो पड़ने भी लगा है
कौशलेन्द्र जी,दीपक जी
पिछले तीस साल से वे मुबारक को झेल रहे हैं, लेकिन सहने की भी एक सीमा होती है।
क्रांति तो अपने देश में भी होनी चाहिए भ्रस्ताचार के खिलाफ
अछि जानकारी
अजय जी क्या बात है ....
आपने तो बड़े ही शानदार तरीके से आपनी बाते कही है ...खासकर आपके लेख का शीर्षक गजब का है
"अली बाबा चालीस चोर "
धन्यबाद
अजय जी हा
हम भी कह सकते है अली बाबा (बेन अली) तो गए क्या अब अरब जगत के चालीस चोरों की बारी है......??
भगवान आपके अंदाजा को सही करे
आभार
अरब में अभी चालीस ऐसे चोर है ???
तब तो सालो की गयी
हेहेहेहेहे
@कौशलेन्द्र जी
आपके विचार का भी समर्थन करता हु .
आजतक कोई जनांदोलन गलत नहीं रहा
निश्चय ही ये भी स्वागतयोग्य है
बेहतरीन लेख
पिछले तीस साल से मिस्र की सत्ता पर कब्जा किए बैठे मुबारक के पास अब विकल्प नहीं रह गए हैं।
हा संतोष जी अब तो लगता है मुबारक को आपना देश भी छोड़ना पड़े अलीबाबा की तरह
मेरे उत्साह वर्धन के लिए आपका आभार
अली बाबा और चालीस चोर
HUM BHI SWAGAT KARTE HAI
इस जनांदोलन का पूरी दुनिया से समर्थन मिलना चाहिए और सम्मान भी
धन्यबाद
शाबास आवाम ...शाबाश अजय
काफी पैनी निगाह है आपकी इस पुरे घटनाक्रम पर
काफी जानकारी भरा पोस्ट
धन्यबाद
जब आम लोग सड़कों पर उतर आते हैं, तो दमनकारी सत्ताओं का दमन भी जवाब देने लगता है।
अजय जी
बहुत ही सुन्दर पोस्ट इस घटनाक्रम में
धन्यबाद
अब तो हमे भी अलीबाबा चालीस चोर की कहानी याद आने लगी
पहले लगा था आप वही पुराणी कहानी सुनाने जा रहे है पर जब पढ़ी तो और भी अच्छी .....नयी कहानी
THANKS
पूनम आप की तरह मै भी पहले सोची की आखिर अली बाबा की कहानी कियु पढ़े वो तो जानते ही है
पर अच्छा हुआ जो पढ़े यहाँ तो नए ज़माने के चोरो का हाल था
@सपनाजी
पुरे लेख से सहमत हु बस एक फर्क है की मैंने अली बाबा चालीस चोर की कहानी आपनी दादी से सुनी थी
धन्यवाद पूनम जी
धन्यवाद सपना जी
अब मुबारक भी गया .....
यमन में विरोध प्रदर्शन तेज़
बहुत बहुत स्वागत
nice post
बढ़िया लेख ...
हा हम भी मिस्र के जनता के साथ है
Perhaps the Misri junta have forgotten the fact that what happened in Iraq after the exit of Saddam Hussain,many innocent people over there killed perhaps in millions and for all this accountability lies on america,britain and israel.And the same thing unfortunately is happening in Egypt.And we should not forget that even after regime change nothing is going to improve peoples' life,unemployment,deep rooted corruptions,and other social malaise continues to remain there.And I am totally against such things and behind all this drama of what's happening there starts with the Coptic Church bombing in Alexandaria wherein some bloody christu have died and that too was the handiwork of zionists.Coptic nexus with corrupt people around the region snowballed into such grave crisis.Christu have just one bloody agenda to disturb the third world and destroy their economy thus become easy to convert
डाबर , मैरिको , इमामी जैसी भारतीय कंपनियों ने इजिप्ट में मौजूदा हालात को देखते हुए वहां अपने प्लांट बंद कर दिए हैं। ये माहौल का जायजा ले रहे हैं। इसी तरह बीपी , ट्रांसओशन और डायमंड ऑफशोर ड्रिलिंग इंक समेत कई एनर्जी कंपनियों ने भी इजिप्ट में अपना काम रोक दिया है।
मिस्र के राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक ने अपने खिलाफ हो रहे जबर्दस्त विरोध प्रदर्शनों के आगे घुटने टेकते हुए कहा कि वह आगे राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव नहीं लड़ेंगे। मिस्र में सितंबर में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं। उधर, मिस्र में लोग मुबारक के इस्तीफे से कम पर कतई राजी नहीं हैं।
एक और शानदार पोस्ट के लिए आपको धन्यबाद अजय जी
शीर्षक बहुत ही सटीक है
नए वर्ष में लोगो का नए सोच के साथ बढ़ना प्रसंसनीय है
बहुत ही स्वागत योग्य कदम है वह के जनता की
अभी तो एक से एक लुटेरे पड़े है पर शुरुवात अच्छी है
शानदार आगाज
हमें भी भ्रष्टाचार के खिलाफ लामबंद होना चाहिए
Black mony वापस आपने देश में मंगवाने के लिए सरकार पे जनता का दबाब जरूरी है
भारत में बदलाव से काम नहीं चलेगा
यहाँ तो आप बदलेंगे किससे कालाधन तो सभी पार्टी के नेताओ का है वो भला कियु लाना चाहेंगे वापस
ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ही कुछ कर सकता है
@पार्थ जी जो भी हो इस दशक में बहुत कुछ बदलने वाला है ऐसा लगने लगा है
और एक न एक दिन काला धन भी वापस आपने देश जरूर आएगा
@अजय जी मुबारक के बाद अब कितने बचेंगे 39
@narenda
अजय का मतलब मुहाबरे से है जो यहाँ फिट बैठता है ३९ से ज्यादा भी हो सकते है चोर या कम भी
हा अब बाकियों की बारी है बचना है तो सुधर जाये
वरना .....पब्लिक सब जानती है
अरब में तो और भी दमनकारी शासन है ...
@पार्थ जी जब आम लोग सड़कों पर उतर आते हैं, तो दमनकारी सत्ताओं का दमन भी जवाब देने लगता है। ट्यूनीशिया में यही हुआ, जब लोग सड़कों पर उतर आए और उन्होंने पीछे हटने से इंकार कर दिया, तो सेना ने भी उनपर गोलियां चलाने से मना कर दिया।
@ santosh ji
पर डर बस इस बात का है की अमेरिका इसका लाभ न उठाले वो बहुत चालक देश है
@नरेन्द्र जी
अमेरिका तो वैसे भी मुबारक के साथ था ....पर अब ओबामा कहता है जनता के साथ है
हर देश में जबरजस्ती दखल करता है US
खैर अभी वह जनता को मुबारक से छुटकारा चाहिए
very good
good thought
सही कदम
@ parth ji
@ santosh ji
आपलोगों का बहुत धन्यबाद चर्चा के लिए
अजय जी आपके अगले पोस्ट का इंतज़ार रहेगा
धन्यबाद
इसे कहते है जनता की ताक़त, अरे भारत के बाईमान नेताओ तुम भी सुधर जाओ| क्योकि भारत की जनता मिस्त्र की जनता से जयदा बुरा हाल करेगी तुम बाईमान नेताओ का|
@बेनामी जी अपना नाम तो बताओ भाई
भारत में बग़ावत की कोई ज़रूरत नही है यहाँ कोई नेता ऐसा नहीं है जिस पर विस्वास किया जाए हाँ सुधार की ज़रूरत है जिस मुल्क में बग़ावत होती है वो मुल्क तबाह और बर्बाद हो जाता है और अच्छे लोग सुधार पसंद करते हैं आप एक अच्छे इंसान हैं संयम रखें धन्यवाद
बहुत ही सुन्दर पोस्ट ...आभार
आपकी कहानी अच्छी थी इसका प्रभाव तो औरो पे पड़ेगा ही
@अजय जी
पर वहा लोगो के सुरक्षा का संकट भी खड़ा हो सकता है
@priti
'इजिप्ट के महान नागरिकों आपकी सशस्त्र सेनाएं जनता के वाजिब हकों को पहचानती हैं। हमने इजिप्ट के लोगों के खिलाफ न कभी ताकत का इस्तेमाल किया है न करेंगे। आपकी सेनाएं जानती हैं कि आपकी मांगें जायज हैं। हमारी इच्छा है कि हम देश और उसकी जनता को बचाने की जिम्मेदारी उठाएं। हम वचन देते हैं कि हर कोई शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात कह सकेगा।' ये इजिप्ट की सेना की तरफ से आया बयान है.. ये बयान इतिहास की धरोहर है.. दुनिया के तमाम तानाशाहों के लिए एक चेतावनी है.. तमाम जहाँ की सेनाओं के लिए आदर्श बयान है..
अजय इस बयान को भी पोस्ट(लेख)में लिखना चाहिए था . ये तो और भी स्वागत योग्य बयान है
जानकारी के लिए धन्यबाद
भारतवासी मिस्त्र की जनता से कुछ प्रेरणा लें और अपने देश में भी फैली अराजकता, महँगाई,घोटलेबाजों को सत्ता से दूर करने के लिए ऐसे कदम उठाए.इसके लिए ज़रूरी है किसी ऐसे संघटन का सपोर्ट जो जनता का हॉंसला बढ़ाए, जैसा मिस्त्र की आर्मी ने जनता का साथ देने का फ़ैसला किया.
भारतवासी मिस्त्र की जनता से कुछ प्रेरणा लें और अपने देश में भी फैली अराजकता, महँगाई,घोटलेबाजों को सत्ता से दूर करने के लिए ऐसे कदम उठाए.इसके लिए ज़रूरी है किसी ऐसे संघटन का सपोर्ट जो जनता का हॉंसला बढ़ाए, जैसा मिस्त्र की आर्मी ने जनता का साथ देने का फ़ैसला किया.
ऐसा ही कुछ भारत में भी होना चाहिए तब ही इन भ्रष्ट नेताओ और सरकारी लोगो से मुक्ति मिलेगी. मैं दुआ करता हूँ की भारत की जनता भी जल्द से जल्द जागे.
ऐसा ही कुछ भारत में भी होना चाहिए तब ही इन भ्रष्ट नेताओ और सरकारी लोगो से मुक्ति मिलेगी. मैं दुआ करता हूँ की भारत की जनता भी जल्द से जल्द जागे.
भारत में भी ऐसी ही बग़ावत की ज़रूरत है, कोई आएगा मेरे साथ.9911564282
anil9gupta@gmail.com
बराबर यही होना चाहिए।
सब अमेरिक़ी खेल है
सूडान , सीरिया यहाँ भी बड़कने लगी है आग
करीब 30 साल से शासन कर रहे मिस्र के राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक और उनके परिवार की कुल संपत्ति करीब 65 बिलियन डॉलर (2925 अरब रुपए) आंकी गई है। एक संस्थान आईएचए ग्लोबल इनसाइड के अनुसार मुबारक के परिवार की लंदन, पेरिस, मेड्रिड, दुबई, वाशिंगटन, न्यूयार्क और फ्रेंकफुर्ट सहित कई स्थानों पर अरबों रुपए मूल्य की चल-अचल में संपत्ति है।
persident ko resigm karna chahiye.kyunki misr ki aam janta unhe pasand nahi kar rahi hai.
the politician should resign at thier own so that the public will not suffer the negativities of the "Bagaawat".but if this does not happen then people should force political party to decline and do BAGAAWAT,like it is happening in kahira at present.
हमारे यहां 64 सालो से एक परिवार विदा नही ले रहा है उसे भी विदा करना होगा
हमारे राजनेता सबक ले. एक दिन भारत की जनता भी रास्ते पर आएगी. वोट तुष्टिकरण नीति को त्यागना ज़रूरी है. सहनशीलता की भी सीमा होती है.
ndia do not wait, learn a lesson from small countries
good write
mujhe lagta hai ...bahut bhari asar hoga es janandolan ka
बहुत बढ़िया जानकारी दी गई है| अरब देश प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकेंगे ऐसा लगता है|
ये महज़ अरब तक ही सीमित करके नहीं देखा जा सकता है. दुनियां में जहां भी शासक जनता की भावनाओं की क़द्र नहीं करेगा वहां यही होगा.
ये अय्याश और अमरीका परस्त अरबी शासकों के ख़िलाफ़ जनता का दबा हुआ ग़ुस्सा है जो अब सामने आ रहा है.
जनता की रोके राह, समय में ताव कहाँ
वह जिधर चाहती काल उधर ही मुड़ता है.
मेरा विश्वाश है कि अरब की जनता की प्रबल इच्छाशक्ति अरब को भी बदलकर रखेगी.
अरब की जनता को हमारी शुभकामनाऍ.
जनाब, इस्लाम और लोकतंत्र साथ साथ नहीं चल सकता है, वहाँ कोई और तानाशाह आ जाएगा.
Indar Hooda
मिस्र में जो कुछ भी किया जा रहा है, उसका दुनिया में अच्छा प्रभाव होगा, लेकिन यहाँ निराशाजनक है कि आंदोलन के खलनायक मुबारक को जनता कोई विकल्प नहीं सुझा पाई है. आंदोलन की उपलब्धियों को चार चांद लग जाते यदि नायक, निर्देशक और पटकथा लेखक बिल्कुल साफ़ साफ़ होतीं.
मिस्र के जन उबाल का अरब जगत में क्या असर होगा, यह अनुमान लगाना अभी कठिन है. लेकिन ट्यूनीशिया या मिस्र में जो कुछ भी हो रहा है, वहाँ केवल दमन और शोषण की प्रक्रिया के ख़िलाफ़ आवाज़ है. केवल विरोध करना एक क़दम हो सकता है लेकिन जब तक निर्माण की तस्वीर सामने नहीं आती तब तक बाजी आसानी से पलट सकती है.
naval joshi
अंजाम देखा आपने
हुस्ने मुबारक का
था मिस्र का भी वही
जो है हाल भारत का
परजीवियों के राज का
तख्ता पलट कर दो
जन में नई क्रांति का
जोश अब भर दो
उठो आओ हिम्मत करो
क्रांति का परचम धरो
मत भूलो यह सरोकार
अच्छा है मानवाधिकार
राजेश सिंह
धन्यबाद राजेश जी
भारत में बग़ावत की कोई ज़रूरत नही है यहाँ कोई नेता ऐसा नहीं है जिस पर विश्वाश किया जाए हाँ सुधार की ज़रूरत है जिस मुल्क में बग़ावत होती है वो मुल्क तबाह और बर्बाद हो जाता है और अच्छे लोग सुधार पसंद करते हैं आप एक अच्छे इंसान हैं संयम रखें धन्यवाद
ऐसा ही कुछ भारत में भी होना चाहिए तब ही इन भ्रष्ट नेताओ और सरकारी लोगो से मुक्ति मिलेगी. मैं दुआ करता हूँ की भारत की जनता भी जल्द से जल्द जागे.
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