भगवत् कृपा हि केवलम् !

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Monday, 21 March 2016

फूल की तरह तू भी खुशबू बिखेर यहाँ.....

विश्व कविता दिवस के अवसर पर मै आप लोगो के साथ ये छोटी सी कविता साझा कर रहा हू जो मैंने अपने स्कूल के दिनों में वर्ष 1999 में लिखी थी ।

आया है तू ये जहा में तो कुछ तो कर नया
फूल की तरह तू भी खुशबू बिखेर यहाँ ..।।


एक बात जान ले तू है नही देवा..
करने पड़ेंगे हर करम चाहे हो सज़ा ।
इंसान है तू इंसान की रंगत को बढ़ा...
आया है तू ये जहा में तो कुछ तो कर नया
फूल की तरह तू भी खुशबू बिखेर यहाँ ..।।

मुश्किलें है बहुत पर कदम तो बढ़ा
रास्ते कटते नही बिन पाये सज़ा ।
मिल जाएगी मंजिल तुम्हे बढ़ तो जरा...
आया है तू ये जहा में तो कुछ तो कर नया
फूल की तरह तू भी खुशबू बिखेर यहाँ ..।।

आया है तू ये जहा में तो कुछ तो कर नया
फूल की तरह तू भी खुशबू बिखेर यहाँ ..।।

सभी मित्रो को "विश्व कविता दिवस" की अनेको अनेक शुभकामनायें !
आप सभी का स्नेह हमें सदैव मिलता रहे - अजय कुमार दूबे

Friday, 7 January 2011

नव दशक की शुभकामनाएँ!

दूसरी सहस्राब्दी के दूसरे दशक की शुरुआत आप सबको मुबारक हो!
अब से दस वर्ष पूर्व हम सब एक इतिहास का हिस्सा बने. हमें वह श्रेय हासिल हुआ जो हमारे पूर्वजों और हमारी आने वाली कई नस्लों को नहीं मिलेगा. यानी एक सहस्राब्दी से निकल कर दूसरी सहस्राब्दी में प्रवेश.
आगे आने वाली पीढ़ियाँ शायद हमारा नाम न जान पाएँ लेकिन हम यदि वर्ष 2000 से पहले जन्मे हैं तो हमारा शुमार उन लोगों में ज़रूर है जो विलक्षण हैं, यानी इतिहास बदलता देख चुके हैं.
यह वरदान था. लेकिन इसके साथ आईं ज़िम्मेदारियाँ. हम कैसी दुनिया का निर्माण कर रहे हैं.
क्या हम अगली नस्ल को एक ऐसे विश्व की धरोहर दे कर जाएँगे जहाँ हिंसा न हो, जातीय और नस्ली भेदभाव न हों, बीमारियाँ न हों और न ही हो विद्वेष और बदले की भावना.
आप कहेंगे यह हमारा काम नहीं है और न ही हमारे बस में है.
मेरा कहना है यदि हममें से हर एक अपने आसपास का माहौल सुधार सके, अपने परिवार में यह बीज बो सके जो आगे चल कर एक फलदायक पेड़ का रूप ले ले तो यह काम कोई मुश्किल नहीं है.

इस ब्लाग के माध्यम से मेरा आपसे अपील है कि आज एक संकल्प कीजिए.
दूसरी सहस्राब्दी का दूसरा दशक आप संवारेंगे. जहाँ तक हो सकेगा इसमें हाथ बंटाएँगे. अपने को कमतर नहीं समझेंगे और इस बात को पहचानेंगे कि यह देश, यह दुनिया आपकी है और आप इसे रहने लायक़ बनाने की क्षमता रखते हैं.
क्या आप वह दिन ला पाएँगे जब हमारी नई पीढ़ियाँ पूछें कि बेईमानी, भ्रष्टाचार, रिश्वतख़ोरी, झूठ, लालच और धोखाधड़ी किस चिड़िया का नाम है?

आप वह दिन ला सकते हैं. आप बहुत कुछ कर सकते हैं!

 नव दशक की शुभकामनाएँ!

आपसभी का विचार आमंत्रित है- अजय कुमार दुबे